Friday, July 12, 2024
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हिंदी सिनेमा जगत की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी

हिंदी सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी ने पर्दे से लेकर निजी जिंदगी में भी दर्द का सिवा कुछ ना मिला। बचपन से दर्द का जो रिश्ता हुआ वो जिंदगी के आखिरी पल तक उनके साथ ही रहा। मीना कुमारी इतनी बेहतरीन एक्ट्रेस थी कि दर्शकों के साथ-साथ फिल्म निर्माता और निर्देशक भी उनकी अदाकारी के दीवाने थे। दिलीप कुमार और राज कुमार जैसे एक्टर भी मीना कुमारी के सामने एक्टिंग करते वक्त असहज हो जाते थे। राज कुमार तो अक्सर मीना कुमारी के सामने अपने डायलॉग तक भूल जाते थे। साहब बीबी और गुलाम फिल्म में मीना कुमारी को साइन करवाने के लिये गुरुदत्त ने लंबा इंतजार किया था। उन्होंने अपनी जिदंगी का दर्द कभी अपने काम पर पड़ने नहीं दिया। जिंदगी के अंत तक उन्होंने अपना काम बेहतरीन तरीके से किया।

हिंदी सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी ने पर्दे से लेकर निजी जिंदगी में भी दर्द का सिवा कुछ ना मिला। बचपन से दर्द का जो रिश्ता हुआ वो जिंदगी के आखिरी पल तक उनके साथ ही रहा। मीना कुमारी इतनी बेहतरीन एक्ट्रेस थी कि दर्शकों के साथ-साथ फिल्म निर्माता और निर्देशक भी उनकी अदाकारी के दीवाने थे। दिलीप कुमार और राज कुमार जैसे एक्टर भी मीना कुमारी के सामने एक्टिंग करते वक्त असहज हो जाते थे। राज कुमार तो अक्सर मीना कुमारी के सामने अपने डायलॉग तक भूल जाते थे। साहब बीबी और गुलाम फिल्म में मीना कुमारी को साइन करवाने के लिये गुरुदत्त ने लंबा इंतजार किया था। उन्होंने अपनी जिदंगी का दर्द कभी अपने काम पर पड़ने नहीं दिया। जिंदगी के अंत तक उन्होंने अपना काम बेहतरीन तरीके से किया।

बहुत छोटी सी उम्र में ही मीना कुमारी ने फिल्मों में काम करना शुरु कर दिया था। उस समय में मीना कुमारी को लोग बेबी मीना के नाम से जानते थे। मीना कुमारी को असली पहचान फिल्म बैजु-बावरा से मिली थी। असल जिंदगी में मीना को कभी सच्चा प्यार नसीब ना हुआ। फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही और मीना कुमारी की मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई थी। ये मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। मीना कुमारी के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। ऐसे में कमाल और मीना ने एक क्लीनिक में दो घंटे के अंदर शादी रचा ली। मीना की फिजियोथैरिपी चल रही थी। उनके पिता मीना को उनकी बहन के साथ क्लिनिक छोड़ आते थे और फिर दो घंटे बाद लेने आते थे।

14 फरवरी 1952 को इस दो घंटे के बीच दोनों की चोरी छिपे शादी हुई थी। जब मीना के पिता को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने इस रिश्ते का विरोध किया और अमरोही संग तलाक लेने को कहा। लेकिन मीना ने पिता की बात मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उनके पिता ने एक शर्त रखी या तो वह अमरोही से तलाक ले वरना घर छोड़ दें। मीना ने पति के लिए पिता का घर छोड़ दिया। कमाल अमरोही पहले से ही शादी-शुदा थे और तीन बच्चों के पिता थे। ऐसे में कमाल को चारों से दवाब पड़ने लगा कि वो मीना कुमारी को छोड़ दें। पहली शादी बचाने के लिए कमाल ने मीना को खत लिख दिया की इस निकाह को एक भूल समझकर खत्म कर दें। इसके जवाब में मीना ने लिखा, ‘मुझे लगता है कि आप मुझे समझ नहीं पाए और समझ भी नहीं पाएंगे। बेहतर होगा कि आप मुझे तलाक दे दें’। इसके बाद दोनों अपने काम में व्यस्त हो गए। लेकिन ये रिश्ता ना टूट पाया और ना सही तरीके से जुड़ पाया। मीना कुमारी को पर्दें पर अपार सफलता मिलने लगी। ये सफलता कमाल को रास नहीं आईं। कमाल ने मीना कुमारी के लिए तमाम पाबंदिया लगा दी जैसे 7 बजे से पहले शूटिंग खत्म कर लें, अपनी ही गाड़ी से चलें, उनके कमरे में मेकअप मैन के अलावा किसी और की एंट्री नहीं होगी।

मीना ने सारी बातें मान ली लेकिन रिश्ते में फिर भी सुधार नहीं हुआ। पाकीजा के निर्माण के वक्त कमाल आर्थिक संकट से घिर गए। मीना कुमारी ने उनकी बहुत मदद की इसके बाद भी फिल्म बनाने के बाद दोनों के बीच तलाक की नौबत आ गई। साहब बीवी और गुलाम की अदाकारा मीना के जीवन में इतने दुख और तनाव थे कि उन्हें रातों को नींद नहीं आती थी जिस वजह से वह नींद की गोली लेने लगी। उनके डॉक्टर ने नींद की गोलियों की जगह, हर दिन एक पेग ब्रांडी लेने की सलाह दी थी। ब्रांडी लेते-लेते मीना इसकी आदी हो गई और इसी शराब की लत ने 31 मार्च, 1972 को उनकी जान ले ली।

 

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